my tukbandi

हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को स्वर्णिम बना दिया करते हैं।

My Crazy Kavita: सर्दी से सावधान! ओढ़ लो टोपी, ढक लो कान...



सर्दी से सावधान!
ओढ़ लो टोपी, ढक लो कान,
गोंद के लड्डू बनवा लो,
चालू कर दो खान-पान.

रोटी खाओ बाजरे की,
धाप के पीओ राबड़ी,
सुबह-सुबह ये मंत्र बोलो-
"कर दे राम तावड़ी,
जी'व थारी डावड़ी."

सर्दी पड़ रही है तगड़ी,
निकाल लो चाहे अब गुदड़ी,
आओ ताऊ बांध के पगड़ी,
ताप लेते हैं थोड़ी सिगड़ी.

गिरते-गिरते आ ही गई,
भारी गिरावट पारे में,
धूप जम गई मुंडेर पर,
टपकती नहीं चौबारे में.

ठंडे पानी से नहाना नहीं,
सुन लो सब नर-नारी,
सूचना ये 'my tukbandi' द्वारा,
तन-हित में जारी.

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राबड़ी=राजस्थान और हरयाणा का प्रमुख पेय, तावड़ी=धूप, जी'व=जीती रहे, थारी=तुम्हारी, डावड़ी=लड़की, गुदड़ी=सर्दियों में ओढ़ने का रजाई जैसा घना वस्त्र.