my tukbandi

हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को स्वर्णिम बना दिया करते हैं।

A Lovely Hindi Poem: प्रेम-पथ पर गुलाब पड़ा है...



प्रेम-पथ पर गुलाब पड़ा है,
खुली आंख में ख्वाब पड़ा है.

चांद सा वो मुखड़ा दिखलाए,
दिल अपना बेताब पड़ा है.

चश्म-ए-यार में डूब जाओेगे,
बहुत बड़ा गिरदाब पड़ा है.

आओ मिलकर मौसम बनाएं,
कई दिनों से ख़राब पड़ा है.

जीवन-खाते की बड़ी बही में,
पाई-पाई का हिसाब पड़ा है.

आइए राजू! राम-राम करते हैं-

सुरमई शाम के सिरहाने पर,
नया-नया माहताब पड़ा है.

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चश्म-ए-यार=प्रेयसी की आंखें, गिरदाब=भंवर, माहताब=चंद्रमा.