my tukbandi

हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को स्वर्णिम बना दिया करते हैं।

Hindi Poem: छलकता जाम रोज लेते हैं...



ना दिमाग पर बोझ लेते हैं,
ना ही दिल पर बोझ लेते हैं.

आंख में आए पानी तो,
हंसते - गाते पोंछ लेते हैं.

छोटी-छोटी बातों में भी दोस्त,
हम खुशियां खोज लेते हैं.

कुछ खट्टे - कड़वे लफ्ज़ों को,
दिल ही में दबोच लेते हैं.

देख दुनिया के चाल - चलन,
अच्छा बुरा - सब सोच लेते हैं.

जीवन की इस मदिरा का,
छलकता जाम रोज लेते हैं.

दोस्तों! अगर कविता पसंद आई हो तो 'my tukbandi' को facebook पर like जरूर कीजियेगा: