my tukbandi

हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को स्वर्णिम बना दिया करते हैं।

A Sweet Hindi Love Poem for Her: जब आंखें तुझसे चार हुई...



जब आंखें तुझसे चार हुई,
मेरे मन को ख़ुशी अपार हुई.

चहक उठा अलसाया दिल,
धड़कने आर की पार हुई.

मोर पपीहा बुलबुल बोली,
और सावन की बौछार हुई.

पहली नज़र में दीवाना हुआ,
फिर दुनिया गुलज़ार हुई.

प्रेम की ग़ज़लें कहने लगी,
कलम बड़ी कलाकार हुई.

दिल के दरवाजे पर सनम,
तेरी यादें बंदनवार हुई.

सुन्दर तस्वीरें तेरी बनाए,
ये अंखियां भी फ़नकार हुई.

और...

तेरे इश्क़ का असर ये हुआ,
टूटे तारों में झनकार हुई.

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गुलज़ार=फूलों का बगीचा, बंदनवार=आम, अशोक आदि की पत्तियों को किसी लम्बी रस्सी में जगह-जगह टाँकने पर बननेवाली श्रृखला जो शुभ अवसरों पर दरवाजों, दीवारों आदि पर लटकायी जाती है, फ़नकार=कलाकार.