my tukbandi

हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को स्वर्णिम बना दिया करते हैं।

A Poem full of Zeal: समन्दर को चाहे खामोश रहने दो...



समन्दर को चाहे खामोश रहने दो,
मगर मुझे कुछ कहना है कहने दो।

कोई नया रुख दो इन हवाओं को आज,
इन्हें आंधियों की तरह मत बहने दो।

मंजिल है दूर अभी चलना है बहुत,
मेरे पांव को कांटे की चुभन सहने दो।

मोहब्बत फैला दो यहाँ हर  तरफ,
किसी आंख में आंसू  मत बहने दो।

चाहे कर दो हर राज़ को बेपर्दा यारों,
मगर इस 'राज़' को राज़ रहने दो।

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