my tukbandi

हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को स्वर्णिम बना दिया करते हैं।

Hindi Poem: मन हमारा पतंग समान...



मन हमारा पतंग समान!

इसे ढील दो,
दूर और बहुत दूर जाने दो,
कल्पना के आकाश में गोते खाने दो.

बस ये ध्यान रखो...

'डोर कहीं से टूट ना जाय,
चरखी हाथ से छूट ना जाय.'

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