my tukbandi

हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को स्वर्णिम बना दिया करते हैं।

Hindi Poem: अरसे बाद वो ख्वाब में आया...



अरसे बाद वो ख्वाब में आया,
फिर  भी मगर नक़ाब में आया।

घर ही की बात थी मगर यारों,
कर्ज़  बहुत हिसाब में आया।

संभलकर  रहना  हसीनों  जरा,
गुलाब  अपने शबाब  में  आया।

खूबसूरत सा सवाल था मेरा,
गुस्सा मगर जवाब में आया। 

आरजू  तेरी  भी पूरी हुई 'राजू',
नाम  तेरा भी इंकलाब में आया।

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नक़ाब= पर्दा; शबाब= योवन, जवानी; इंकलाब= क्रांति.